नजरिया
-
समपादकीय : पुलिस और प्राधिकरण के निशाने पर पत्रकार क्यों ? राजेश बैरागी
राजेश बैरागी । यदि मैं यह कहूं कि बहुत सी सुनी सुनाई बातों के आधार पर ख़बरें चलाई जा सकती…
Read More » -
नेता वही जो फॉर्च्यूनर कार से आए, पर फॉर्च्यूनर कार कहाँ से आए
आशु भटनागर । एक वक्त था जब अंबेसडर इस देश में राजनेताओं की शान की सवारी होती थी फिर अन्ना…
Read More » -
नोएडा अध्यक्ष जी के सुपुत्र की शादी मे ज़रूर आना
कुछ साल पहले एक फिल्म आई थी “शादी में जरूर आना” और यह फिल्म उत्तर प्रदेश के परिवेश में एक…
Read More » -
अगर जो सांड(नी) टकर जाए? राजेश बैरागी
क्या केवल छुट्टे सांड ही राहगीरों को टक्कर मारते हैं या सांडनी, क्षमा करें और गौरक्षक तो अवश्य क्षमा करें…
Read More » -
इफ्तार से रफ्ता – रफ्ता रिश्तों को रफ्तार : अमर आनंद
अमर आनंद । लालू के परम मित्र और कभी कभार चरम शत्रु अब एक बार फिर उनके परिवार के पास…
Read More » -
संयोग, प्रयोग और आदित्यनाथ का योग : अमर आनंद
अमर आनंद I योगी फिर से आ चुके हैं। साथियों के साथ यूपी में जीत के बाद जश्न में लखनऊ…
Read More » -
औरत बिकती है,बोलो खरीदोगे? धीरज फूलमती सिंह
औरत ममता की मूर्ती होती है,नेक दिल होती है, रहम दिल होती है। विश्व का ऐसा कोई धर्म नही है…
Read More » -
कृषि उत्थान के बीच किसान और बजट पर मोदी सरकार की नीति कितनी कारगर : प्रो. (डॉ) सुबोध भटनागर
प्रो. (डॉ) सुबोध भटनागर । किसानों से संबंधित तीनो कानूनों पर लंबी ऊहापोह के बाद उनकी वापसी के साथ किसान भी…
Read More » -
हिंदी पत्रकारिता तो जैसे वैटिलेटर पर अपनी आखरी सांसे गिन रही है : धीरज फूलमती सिंह
हाल ही में ईकरा फाऊँडेशन द्वारा एक सर्वे हुआ था,जिसमे यह बात उभरकर आयी कि लोग सबसे ज्यादा अविश्वास पत्रकारों…
Read More »