संपादकीय
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ऑफिस ऑफ़ प्रॉफिट विवाद : चोरी और सीनाजोरी – योगेन्द्र यादव
योगेन्द्र यादव I ये ऑफिस ऑफ़ प्रॉफिट वाला विवाद एक बार फिर साबित करता है कि भ्रष्टाचार का खात्मा करने आई…
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आख़िर जवाहर बाग में अनधिकृत कब्जा किए लोगों को सत्याग्रही क्यों कहा जा रहा है ? आर एन श्रीवास्तव
आर एन श्रीवास्तव I आख़िर जवाहर बाग में अनधिकृत कब्जा किए लोगों को सत्याग्रही क्यों कहा जा रहा है ? यह…
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नए परिध्र्श्य में अखलाक की मौत पर उठते नए सवाल : कैसा चरित्र है हमारे महान धर्मनिरपेक्ष नेताओं का? आर के सिन्हा
आर.के.सिन्हा I पिछले साल 30 सितंबर को राजधानी से सटे नोएडा के बिसहाड़ा गांव में एक शख्स को अपने घर में गौं-मांस रखने के आरोप में उग्र भीड़ ने मार डाला था। ज़ाहिर है घर के फ्रिज में गौ मांस उसने पूजा करने के लिए तो रखा नहीं होगा, खाने के लिए ही रखा होगाI घटना के बाद तमाम तथाकथित धर्मनिरपेक्ष नेता मृतक मोहम्मद अखलाक के घर पहुंचने लगे,ठीक उसी तरह जैसे बीच जंगल में मधुमकखी का बड़ा छत्ता तूफ़ान में गिर जाये तो भालू-बन्दर उस पर टूट पड़ते हैं, वे उसके घर में जाकर संवेदना कम और सियासत ज्यादा करते नजर आ रहे थेI अब उत्तरप्रदेश सरकार के मथुरा स्थित लैब के फोंरसिक रिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि भीड़ के शिकार हुए मोहम्मद अखलाक के घर से मिला मांस “गोमांस” ही था।फोरेंसिक रिपोर्ट के नतीजे आने के बाद अब उन सियासी रहनुमाओं से दो सवाल पूछने करने का मन कर रहा है, पहला क्या वह अखलाक की हत्या के बाद उसके घरवालों से संवेदना जाहिर करने के लिए बिसहाड़ा गांव पहुंचे थे। पहला, क्या वे अखलाक की मौत पर अफसोस जता रहे थे? अगर वे अफसोस जता रहे थे तो ठीक है। पर क्या वे इस क्रम में अखलाक के घर में रखे हुए गौमांस को सही ठहरा रहे थे? उत्तर प्रदेश में गौ-मांस की बिक्री से लेकर इसके सेवन पर कानूनी रोक है। इसलिए ये सवाल पूछा जा रहा है कि क्या अखलाक को अपने घर में गौं-मांस रखना चाहिए था या उसका सेवन करना चाहिए था ? संवेदनाओं का सच अखलाक के घर कांग्रेस के वाइस प्रेसिडेंट राहुल गांधी से लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और असदद्दीन ओवैसी से लेकर माकपा की वृंदा करात तक ने बाकी तमाम दलों के नेताओं ने हाजिरी दी। यानी अखलाक की जघन्य हत्या के बाद उसके घर नेताओं का तांता लगा ही रहा। केन्द्रीय पर्यटन और संस्कृति राज्यमंत्री महेश शर्मा ने खुद अखलाक के घर जाकर कहा, “यह हमारी संस्कृति पर धब्बा है और सभ्य समाज में इस तरह की घटनाओं का कोई स्थान नहीं है। अगर कोई कहता है कि यह पूर्व नियोजित था तो मैं इससे सहमत नहीं हूं।” इसके बावजूद विपक्ष के नेताओं को तो मानो सरकार को घेरने का मौका मिल गया हो। कानून-व्यवस्था राज्य का दायित्व है। अख़लाक़ के हिन्दू मित्र ने जब पुलिस को फ़ोन कियातब पुलिस तो आई नहीं जब उसकी मौत की सूचना दी गई तो तब पुलिस आईI यानी उस घटना को रोक पाने में उत्तर प्रदेश का पुलिस महकमा पूरी तरह फेल हुआ। लेकिन,धर्मनिरपेक्ष नेताओं ने सारा दोष केन्द्र सरकार पर डाल दिया और पूरे देश में असहिशुनाता का माहौल है इसका नारा बुलंद कर दिया, जिसे वामपंथी मीडिया ने पुरजोर हवा देकर देश भर में फ़ैलाने का काम कर दिया। अपने जहरीले बयानों के लिए बदनाम हो चुके ओवैसी ने अखलाक के कत्ल को ‘पूर्व नियोजित हत्या’ बताया। ओवैसी ने तो यहां तक कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने गायिका आशा भोंसले के बेटे की मौत पर शोक जताया पर उन्हें अखलाक की मौत पर संवेदना व्यक्त करना सही नहीं लगा।“ अब जरा देख लीजिए की ओवैसी किस तरह से लाशों पर सियासत करते हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी पीछे रहने वाले नहीं थे। उन्होंने गोवध और…
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सुविधाभोगी लेखकों के समूह का नेतृत्व करती अरुंधति राय सेना के खिलाफ क्यूँ ? आर के सिन्हा
आर. के. सिन्हा I अरुंधति राय उन मसिजीवियों में शामिल हैं,जिनकी कलम देश को तोड़ने वाली शक्तियों के लिए ही चलती…
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मोदी सरकार के २ साल : भ्रष्टाचार घोटालो की जगह गांव, नौजवान और औरत है इस सरकार का फोकस – आर के सिन्हा
आर.के.सिन्हा I स्वतंत्र भारत के इतिहास के पन्नों को खंगाल लीजिए आपको समझ आ जाएगा कि इस दौरान किसी भी सरकार…
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नये युग को नया आंबेडकर भी दीजिये – शायक आलोक
विचार करे कि याकूब मेनन जिंदाबाद, मोदी मुर्दाबाद में वह अपने आंदोलन को कितना झोंके .. कितनी ऊर्जा बर्बाद…
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बदलाव ऐसे आता है। मैं मोदी सरकार की इस पहल का मुक्त कंठ से प्रशंसा करता हूँ – शरद श्रीवास्तव
16 जनवरी को माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया के तहत कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएँ कर…
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मालदा, मुस्लिम और पठानकोट के खतरनाक संकेत -आर.के.सिन्हा
आर.के.सिन्हा, सांसद (राज्य सभा) । दो घटनाएं। मालदा में लाखों मुसलमानों की भीड़ का उपद्रव करना। दूसरा, पंजाब के पठानकोट में फिदायिन…
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बड़ा सवाल : नरेंद्र मोदी जी आखिर मज़बूरी क्या है ? – आशु भटनागर
मई २०१४ में जबरदस्त बहुमत से आये सत्ता में आये नरेंद्र मोदी सरकार के २ साल भी पुरे नहीं हुए…
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पठानकोट से संदेश-जागे देश,जारी रहे पाक से गुफ्तुगू भी : आर. के. सिन्हा
आर. के. सिन्हा । पठानकोट के एयरफोर्स बेस पर पाकिस्तानी घुसपैठियों के हमले ने कारगिल के दिनों की यादें ताजा कर दीं।…
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