राजेश बैरागी l सिर में खाज लगने पर कहां खुजलाना चाहिए? क्या हाथ में खुजलाने से इस समस्या का समाधान हो सकता है? परंतु गौतमबुद्धनगर के भाजपा नेता तो ऐसा ही कर रहे हैं।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर क्षेत्र के किसानों के अधिकारों और भूमि अधिग्रहण के विरुद्ध उन्हें मिलने वाली सुविधाओं को लेकर दिन रात चल रहा धरना (महापड़ाव) आज शुक्रवार को उन्तालीस दिन का हो गया। धरने पर किसी दिन को छोड़कर अच्छी खासी भीड़ रहती है।अब तो महिलाओं की उपस्थिति भी आधे के लगभग रहती है। संयोजक डॉ रूपेश वर्मा, मुखिया गबरी यादव आदि दर्जनों किसान नेताओं का परिश्रम धरने को स्थाई और मजबूत बना रहा है।
इतने दिनों के धरने के दौरान किसान नेताओं ने स्थानीय भाजपा नेताओं से भी किसानों की समस्याओं का प्राधिकरण से समाधान कराने के लिए सहायता मांगी है। क्या स्थानीय भाजपा नेता समस्या के समाधान का रास्ता नहीं जानते?
इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए एक सप्ताह पीछे चलते हैं। भाजपा के राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर ने धरना दे रहे किसान नेताओं को जिलाधिकारी से मिलवाया। किसानों ने अपनी समस्याओं को जिलाधिकारी से कहा। सुरेंद्र नागर भी वहां उपस्थित थे। परिणाम क्या निकला?
जिलाधिकारी ने उनकी बात उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। क्या प्राधिकरण के कार्यक्षेत्र में जिलाधिकारी कुछ कर सकते हैं?
यह बात किसानों को न भी पता हो तो सांसद को तो अवश्य पता होगी कि प्राधिकरण के दैनिक कार्यकलापों में जिलाधिकारी की भूमिका नगण्य है। गौतमबुद्धनगर के भाजपाई लोकसभा सांसद डॉ महेश शर्मा बुधवार को धरना स्थल पर किसानों के बीच पहुंचे। उन्होंने प्राधिकरण के चेयरमैन से फोन पर बात की और किसानों को उनकी समस्याओं का समाधान कराने का आश्वासन देकर चले गए।
स्थानीय विधायक धरने के प्रारंभ में ही किसानों को आश्वासन का लॉलीपॉप थमा चुके हैं।समझ से परे यह है कि राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी के सांसद विधायक अपने क्षेत्र के किसानों की समस्याओं का समाधान कराने में असमर्थ क्यों हैं?वे सीधे प्राधिकरण की मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रीमती रितु माहेश्वरी से बात करने से क्यों कतरा रहे हैं? सिर की खाज मिटाने को हाथ क्यों खुजलाया जा रहा है?
एक बात और, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के कमोबेश आधे क्षेत्र से विधायक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अत्यंत निकटता होने का दावा करने वाले जेवर विधायक ठाकुर धीरेंद्र सिंह ने किसानों के इस धरने से दूरी बना रखी है। हालांकि जिन्होंने निकटता भी दिखाई है उनसे ही किसानों को क्या मिला!