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लंबी दूरी की ट्रेनों में रहेंगी जीवन रक्षक दवाएं

29_07_2014-trainपटना : लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रा करने वाले यात्रियों के बीमार पड़ने पर इलाज में कोताही की शिकायतें आम हैं। इसी माह अकेले पटना जंक्शन पर ऐसे पांच यात्रियों की ट्रेन में मौत की सूचना मिली है। रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने सभी जोन के महाप्रबंधकों को लंबी दूरी की सभी ट्रेनों में जीवनरक्षक दवाओं की किट रखने संबंधी पत्र भेजा है। महाप्रबंधक ने भी सभी मंडलों को इससे अवगत कराते हुए अतिशीघ्र जीवनरक्षक दवाओं की किट रखने का निर्देश दिया है।

रेल राज्य मंत्री श्री सिन्हा ने चार दिन पूर्व ही इस संबंध में राज्यसभा में जवाब दिया था। रेल राज्यमंत्री के निर्देश के मुताबिक अब लंबी दूरी की सभी ट्रेनों में सॉरबिट्रेट 10 एमजी, एस्पिरिन 100-150 एमजी, इंजेक्शन डेरीफायलिन, लैसिक्स, ग्लूकोज, एड्रेनेलिन, एफ्कॉरलिन, एट्रोपिन, फेनिरामाइन मैलिएट 25 ग्राम, रिंगर्स सोल्यूशन 450 एमएल, नार्मल स्लाइन के साथ ही प्राथमिक उपचार किट रखने को कहा गया है। यही नहीं ट्रेन के सभी फ्रंट लाइन कर्मचारियों को मेडिकल सहायता प्रशिक्षण देने का भी निर्देश दिया गया है। सभी टीटीई व कर्मचारी अब मेडिकल सहायता का प्रशिक्षण लेंगे।

महाप्रबंधक ने सभी टिकट निरीक्षकों, गार्ड व चालकों को इस बात का निर्देश दिया है कि किसी भी यात्री के गंभीर रूप से बीमार पड़ने की सूचना मिलते ही वे पास के स्टेशन प्रबंधक को सूचना दे देंगे। स्टेशन प्रबंधक पास के निजी अथवा सरकारी अस्पताल या चिकित्सक को एम्बुलेंस के साथ बुलाकर रखेंगे। उस स्टेशन पर ट्रेन का ठहराव न होने के बावजूद वहां ट्रेन रोककर रोगी का इलाज कराया जाएगा। स्टेशन प्रबंधक आसपास के सभी चिकित्सकों, सरकारी अथवा निजी अस्पतालों की पूरी सूची रखेंगे।

NCR Khabar News Desk

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