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झल्लाया पाक, रिहायशी इलाकों में कर रहा है फायरिंग

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जम्मू।। पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज आता नहीं दिख रहा है। एक बार फिर संघर्ष विराम का उल्लंघन करते हुए पाकिस्तानी सैनिकों ने पुंछ के मेंढर में में सैन्य और नागरिक ठिकानों पर फायरिंग की है। इसमें सेना के तीन जवान और दो स्थानीय लोग घायल हो गए। भारतीय सेना ने भी गोलीबारी का जवाब देते हुए फायरिंग की। इससे पहले गुरुवार को पाकिस्तानी सैनिकों ने ऑटोमैटिक हथियारों से काररिगल सेक्टर में भारतीय चौकियों पर फायरिंग की। पिछले 7 दिनों में यह 19वां मौका है, जब पाकिस्तान से सीजफायर तोड़ा है।

सीमा पार बैठे आतंकियों को भारत में घुसपैठ करवाने की असफलता की झल्लाहट अब पाकिस्तानी सैनिकों पर नजर आने लगी है। यही कारण है कि वे अब एलओसी पर गोलाबारी करने के अलावा सीमावर्ती रिहायशी इलाकों में भी गोलाबारी कर दहशत फैला रहे हैं। 16 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा ने कहा, ‘एलओसी के उस पार से चलने वाली गोलियों का निशाना सिर्फ भारतीय अग्रिम चौकियां होती हैं। लेकिन यह गोलियां 2-3 किलोमीटर अंदर रिहायशी इलाकों तक कैसे पहुंच सकती हैं। यह हरकत भारतीय क्षेत्र में घुसकर पाक सेना ही कर सकती है।’ लेफ्टिनेंट जनरल ने कहा कि सेना किसी शर्त पर घुसपैठ के प्रयासों को सफल होने नहीं देगी।

स्वतंत्रता दिवस पर सुबह 7 बजे पाकिस्तान ने पुंछ में मेंढर तहसील के बालाकोट, मंकोट, हमीरपुर और मेंढर सेक्टर की कई अग्रिम चौकियों के साथ सटे रिहायशी क्षेत्रों में जमकर गोलीबारी शुरू कर दी। पाकिस्तान ने रॉकेट और मोर्टार भी दागे, जो रिहायशी क्षेत्रों में गिरे। यह सिलसिला रात डेढ़ बजे तक जारी रहा। इसमें भारतीय सेना के तीन जवान और दो ग्रामीण घायल हो गए। दोनों को इलाज के लिए मेंढर अस्पताल के बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज जम्मू रेफर कर दिया गया।

कश्मीर और जम्मू संभाग में पिछले कुछ दिनों के अंदर पाक कई बार सीजफायर का उल्लंघन कर चुका है। कारगिल सेक्टर में 14 साल बाद पाकिस्तानी सेना ने गुरुवार रात को कारगिल जिले के द्रास में भारत की अग्रिम चौकियों पर तोप के गोले और मोर्टार दागे। अलबत्ता, इससे कोई नुकसान नहीं हुआ। तीन दिन पहले सोमवार की रात को काकसर में चेनीगुंड चौकी पर भी गोलाबारी की गई थी। चेनीगुंड चौकी वही है, जहां से लेफ्टिनेंट सौरभ कालिया अपने साथियों के साथ अप्रैल 1999 में लापता हो गए थे और बाद में पाकिस्तान ने उनके विकृत शव भारतीय सेना के हवाले किए थे। काकसर की चोटियों पर ऊंचाई में स्थित होने के कारण भारतीय जवानों की तुलना में पाकिस्तानी सैनिक ज्यादा अच्छी स्थिति में हैं और वह वहां से लद्दाख और कश्मीर को जोड़ने वाले नैशनल हाईवे को निशाना बना सकते हैं।आशंका जताई जा रही है कि पाकिस्तान की सीमा से घुसपैठिए अंदर आ सकते हैं और यह फायरिंग उन्हीं घुसपैठियों की मदद के लिए की जा रही है। पिछले दो महीने में 28 आतंकियों को मार गिराया है। ये सब बातें इशारा करती है कि पाकिस्तान की इस पूरी कवायद का मकसद कश्मीर में अशांति फैलाना है।

 

NCR Khabar News Desk

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