चेन्नै।। नमाज पढ़वाने वाली दुनिया की पहली मुसलमान महिला अमीना वदूद के मद्रास यूनिवर्सिटी में तयशुदा लेक्चर को पुलिस ने ‘उच्च स्तरीय’ आदेश के चलते कैंसल करवा दिया। इस पूरे मामले पर अब खासा बवाल है और इस कदम कीआलोचना तसलीमा नसरीन पर लगे बैन से की जा रही है। जबकि, पुलिस का कहना है कि उस यह कदम कानून-व्यवस्थाबनाए रखने के लिए उठाया है क्योंकि मुस्लिम संगठन उनका विरोध कर रहे हैं।
रविवार रात यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर आर थंडावन को चेन्नै पुलिस का एसएमएस आया जिसमें कहा गया था- कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस अमीना वदूद के लेक्चर के परमिशन नहीं दे सकती। इसलिए, इसे कैंसलकरें। इस मेसेज के तुरंत बाद वीसी ने लेक्चर कैंसल कर दिया। एक सीनियर पुलिस अधिकारी का कहना है कि वदूद का लेक्चर कैंसल करने का यह फैसला ‘हायर लेवल’ पर लिया गया है।
अमीना वदूद अमरीका से हैं और इस्लामिक फेमिनिस्ट हैं। उन्हें मद्रास यूनिवर्सिटी में ‘जेंडर ऐंड रिफॉर्म्स इन इस्लाम’ विषय पर लेक्चर देना था। इस घटना के बाद अमीना ने ट्वीट किया- यहां मेरे कुछ कमिटमेंट्स हैं जिन्हें पूरा करने के बाद मैं तुरंत ही भारत से चले जाना चाहूंगी। पुलिस का कहना है कि मुस्लिम संगठन अमीना के किसी भी तरह के लेक्चर का विरोध कर रहे हैं।
मद्रास हाई कोर्ट के पूर्व जज के चंद्रू का कहना है कि यह ऐसे ही है जैसे तस्लीना नसरीना को बैन करना। उनका कहना है कि पुलिस उन्हें इस बाबत सुरक्षा क्यों नहीं दे सकती। यूनिवर्सिटी के सूत्रों का कहना है कि पुलिस का कहना है कि तमिलनाडू में उनके एक बार पहले दी हुई स्पीच समस्या पैदा कर चुकी है जबकि वदूद का का कहना है कि वह इससे पहले तमिलनाडू में आईं ही नहीं तो लेक्चर देने की बात ही कहां पैदा होती है।
मामला इस कदर गरमा चुका है कि वीसी और यूनिवर्सिटी का कोई टीचर या प्रफेचर इस बारे में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। मद्रास यूनिवर्सिटी टीचर्स यूनियन और प्रफेसर फोरम ने इस मुद्दे पर कोई कॉमेंट नहीं किया।
कौन हैं अमीना?
अमेरीका में प्रफेसर हैं अमीना वदूद। कुछ साल पहले उन्होंने इतिहास रच दिया था जब उन्होंने लगभग 100 लोगों को नमाज़ पढ़ाई थी। अमीना वदूद ऐसा करने वाली पहली मुसलमान महिला हैं। उनसे पहले सिर्फ पुरूष ही इमाम हुआ करते थे। मस्जिदों ने इस इस विशेष नमाज के लिए जगह देने से मना कर दिया था। जब आयोजकों ने इसके लिए एक भारतीय कला प्रदर्शनी केंद्र को चुना तो उस जगह को भी बम से उड़ा देने की धमकी दी गई। अंत में न्यू यॉर्क के मैनहटन में एक चर्च में नमाज़ पढ़ाई गई जिसमें पुरुषों और बच्चों ने भाग लिया था।
60 साल की वदूद ने 20 साल की उम्र में इस्लाम अपनाया था। सिस्टर्स इन इस्लाम नाम का ग्रुप चलाती हैं और 2005 में नमाज पढ़वाने जैसा ‘दुस्साहस’ करने के बाद चर्चा में आई थीं।