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आरुषि हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट से तलवार दंपति को तगड़ा झटका

261182_226204410751716_174425_nनई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को  आरुषी-हेमराज हत्याकांड में आरोपी तलवार दंपत्ति की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने उन 14 लोगों की गवाही कराने का जिक्र किया था जिन्होंने मामले की शुरुआत में गवाही दी थी। इससे पहले इस याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी खारिज कर दिया था जिसके बाद तलवार दंपत्ति ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

कोर्ट ने साफ कहा है कि गाजियाबाद की विशेष अदालत मे तलवार दंपत्ति के चल रहे बयान जारी रहेंगे। यह बयान धारा 313 के तहत दर्ज किए जा रहे हैं। इसके तहत जज और आरोपी से सीधे सवाल-जवाब किए जाते हैं। आज हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह चौदह गवाहों की गवाही को पहले कराकर इस मामले के दोनों आरोपियों को कोई सर्टिफिकेट नहीं देना चाहते हैं। कोर्ट ने कहा कि वह तलवार दंपत्ति की किसी दलील से इत्तफाक नहीं रखते हैं, लिहाज अपील खारिज की जाती है।

आरुषि हेमराज हत्या मामले में 14 गवाहों को तलब करने की याचिका इलाहाबाद उच्च न्यायालय के ठुकराए जाने के बाद मामले में आरोपी तलवार दंपति ने 24 मई, शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

इस माह यह दूसरा मौका था जब तलवार दंपति ने अतिरिक्त गवाहों को बुलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दी थी। तलवार दंपति जिन गवाहों को उनके बयान दर्ज करने के लिए बुलाना चाहता है उनमें उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) और उस समय सीबीआई के संयुक्त निदेशक अरुण कुमार शामिल हैं। उन्होंने इस याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट के 21 मई के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें कहा गया था कि अभियोजन पर बिना जरूरत वाले गवाहों को बुलाने के लिए दबाव डालने की कोई वजह नहीं है।

हाईकोर्ट का मानना था कि निचली अदालत को यह फैसला करने का अधिकार है कि किन गवाहों को बुलाया जाए और उनके बयान दर्ज किए जाएं। इससे पूर्व 13 मई को हाईकोर्ट ने उनकी याचिका ठुकरा दी थी और निचली अदालत के फैसले को सीधे शीर्ष अदालत में चुनौती देने पर कड़ा एतराज किया था। इसके बाद तलवार दंपति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

शीर्ष न्यायालय की पीठ ने तलवार दंपति से कहा था कि वह पहले हाईकोर्ट जाएं और सीधे सुप्रीम कोर्ट में आने को गलत परंपरा करार दिया।

इस मामले में सीबीआई का कहना यह है कि पांच वर्ष पहले की घटना में 14 वर्ष की आरुषि को उसके माता-पिता ने ही मौत के घाट उतारा क्योंकि घर में बाहर का कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। मामले में सीबीआई जांच का नेतृत्व करने वाले कौल ने अदालत के सामने कहा कि जांच एजेंसी तलवार के आवास में किसी तीसरे व्यक्ति के प्रवेश करने का कोई सुबूत पेश नहीं कर पाई। गौरतलब है कि आरुषि और नौकर हेमराज को 16 मई 2008 को उनके जलवायु विहार स्थित घर में बेडरूम में कटे गले के साथ मृत पाया गया था।

NCR Khabar News Desk

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