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आईपीएल के साथ टीम इंडिया भी होगी बे-सहारा

saharaनई दिल्ली।। स्पॉट फिक्सिंग स्कैंडल के कारण पहले से ही विवाद में आई इंडियन प्रीमियर लीग को मंगलवार को एक और झटका लगा। सहारा समूह ने इस टी-20 लीग से हटने का फैसला किया है। सहारा समूह पुणे वॉरियर्स का मालिक है। साथ ही सहारा समूह ने जनवरी 2014 से भारतीय़ क्रिकेट टीम की स्पॉन्सरशिप छोड़ने का भी फैसला किया है। समूह ने फ्रेंचाइजी फीस कम करने के लिए मध्यस्थता की कार्रवाई के प्रति बीसीसीआई के ढुलमुल रवैये और टीम की बैंक गारंटी को भुनाने के बोर्ड के फैसले के कारण यह कदम उठाया।

अब कभी नहीं लौटेंगे
वर्ष 2010 में 1700 करोड़ रुपये में फ्रेंचाइजी खरीदने वाले सहारा ने कहा कि वह अपने प्रति बीसीसीआई के रवैये से ‘निराश’ है और लीग से दोबारा नहीं जुड़ेगा भले ही उसकी पूरी फ्रेंचाइजी फीस ही क्यों न माफ कर दी जाए। सहारा समूह ने एक बयान में कहा, ‘अगर पूरी फीस भी माफी कर दी जाए तो भी हम आईपीएल फ्रेंचाइजी नहीं रखेंगे। आईपीएल से हटने का सहारा का फैसला अंतिम है। वर्ष 2010 में सहारा ने 94 मैचों के राजस्व आंकड़े के आधार पर फ्रेंचाइजी के लिए 1700 करोड़ की बोली लगाई थी। बीसीसीआई ने चतुराई दिखाते हुए मीडिया में 94 मैचों का आंकड़ा रखा जिससे कि बड़ी रकम मिले। लेकिन हमें सिर्फ 64 मैच मिले।’

बोर्ड पर बरसा समूह

सहारा ने दावा किया कि मध्यस्थता के लिए उसने बोर्ड से कई बार गुजारिश की, लेकिन बीसीसीआई ने कोई ध्यान नहीं दिया। सहारा ने कहा, ‘हमने और कोच्चि की टीम ने तुरंत ही बीसीसीआई से अनुरोध किया था कि तर्कसंगत ढंग से हमारी नीलामी की रकम को घटाया जाए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। हमें विश्वास था कि खेल को कंट्रोल करने वाली बॉडी स्पोर्ट्समैनशिप दिखाएगी। हम जून 2011 से ही बोर्ड से मध्यस्थता के लिए अनुरोध कर रहे हैं। मगर बीसीसीआई को सिर्फ पैसे से लेना-देना है उसे फ्रेंचाइजियों के हितों की परवाह नहीं है। जब हम बोर्ड के बेहरे कानों तक अपनी बात नहीं पहुंचा सके तो हमने फरवरी 2012 में फ्रेंचाइजी से हटने का फैसला किया था। ‘

वादा नहीं किया पूरा
वर्ष 2012 में टूर्नामेंट से हटने और दोबारा जुड़ने के सदंर्भ में समूह ने कहा कि बीसीसीआई ने मध्यस्थता से संबंधित अपना वादा पूरा नहीं किया। उन्होंने कहा, ‘बीसीसीआई ने समाधान के लिए हमसे संपर्क किया और टूर्नामेंट से नहीं हटने का आग्रह किया। मुंबई में बीसीसीआई अध्यक्ष सहित बीसीसीआई के आला अधिकारियों से चर्चा के बाद सहारा और बीसीसीआई ने फरवरी 2012 में संयुक्त बयान जारी किया। संयुक्त बयान में विशेष तौर पर तुरंत मध्यस्थ की नियुक्ति के साथ मध्यस्थता प्रक्रिया शुरू करने का जिक्र था। सहारा ने पांच अप्रैल 2012 को देस के रिटायर्ड चीफ जस्टिस को मध्यस्थ के रूप में नियुक्त करने का सुझाव दिया। बीसीसीआई ने चार महीने तक कोई जवाब नहीं दिया और बार बार याद दिलाने के बाद नौ जुलाई को सहारा के वकीलों को बीसीसीआई का पत्र मिला जिसमें सहारा के प्रस्तावित नाम को ठुकरा दिया गया लेकिन इसके लिए कोई कारण नहीं बताया गया और किसी वैकल्पिक नाम का भी सुझाव नहीं था।’

बैंक गारंटी पर बवाल
समूह ने दावा किया कि बीसीसीआई ने तुरंत गारंटी का भुगतान नहीं होने पर संबंधित बैंक को अदालत में घसीटने की धमकी दी। समूह ने कहा, ‘हमने फिर भी सौहार्दपूर्ण समझौते के लिए संपर्क किया, लेकिन समय पर किसी से फोन पर बात नहीं हो पाई। लेकिन बैंक के लोगों ने हमें बताया कि रात को आठ बजे भी बीसीसीआई के प्रतिनिधि बैंक में मौजूद थे और धमकी दे रहे थे कि अगर बैंक ने बीसीसीआई को पैसों का भुगतान नहीं किया तो वह बैंक को ब्लैक लिस्ट में डालने के लिए अदालत की शरण में जाएंगे। बीसीसीआई से पूछा जाना चाहिए कि उसने बैंक गारंटी भुनाने के लिए दो मई से 19 मई तक बैंक से संपर्क क्यों नहीं किया। यह बताना महत्वपूर्ण है कि पिछले 13 साल में टीम स्पॉन्सरशिप सहित किसी भुगतान में सहारा ने देरी नहीं की।”

क्यों भड़का सहारा
बीसीसीआई के सूत्रों ने कहा कि सहारा समूह पुणे फ्रेंचाइजी की पूरी फीस देने में असफल रहा है, जिसके कारण बीसीसीआई ने बैंक गांरटी भुनाना शुरू कर दिया है। बोर्ड के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, ‘हां, बीसीसीआई ने मौजूदा वर्ष के लिए पुणे वारियर्स फ्रेंचाइजी की फीस हासिल करने के लिए बैंक गारंटी भुनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।’ सहारा ने 10 साल के लिए फ्रेंचाइजी खरीदी थी, लेकिन इस साल उसने करीब सिर्फ 34 करोड़ रुपये की फ्रेंचाइजी फीस का भुगतान किया था, जबकि उसे कुल 170 करोड़ रुपये देने थे। उन्होंने कहा, ‘इस साल जनवरी में सहारा ने इस साल की फ्रंेचाइजी फीस का करीब 20 प्रतिशत भुगतान कर दिया जो करीब 170 करोड़ रुपये था। बोर्ड को बताया गया कि वे बची हुई राशि 19 मई तक दे देंगे लेकिन वे इसमें असफल रहे। आईपीएल की गवनिर्ंग काउंसिल ने इसके बाद बैंक गांरटी को भुनाने का फैसला किया।’

NCR Khabar News Desk

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