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यूपी: टीजीटी-पीजीटी शिक्षकों की नौकरी पर संकट

इलाहाबाद उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की टीजीटी-पीजीटी परीक्षा में हुई मनमानी का खामियाजा चयनित शिक्षकों को भुगतना पड़ेगा।

टीजीटी और पीजीटी के कई विषयों के लिए 2009 एवं 2010 में हुई परीक्षा में प्रश्नपत्र को लेकर सवाल उठने के बाद बोर्ड की ओर से परिणाम का पुनर्मूल्यांकन कर रिजल्ट बदल दिए गए हैं। अभी कुछ विषयों के परिणाम का पुनर्मूल्यांकन बाकी है। लिखित परीक्षा का परिणाम बदल जाने के बाद आयोग की ओर से साक्षात्कार के बाद जारी अंतिम परिणाम भी बदल जाएगा।

प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में खाली शिक्षकों के पदों को भरने के लिए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से 2009 एवं 2010 में हिन्दी, सामाजिक विज्ञान, संस्कृत, नागरिक शास्त्र, इतिहास, गणित, कला सहित कई विषयों के लिए परीक्षा कराई गई थी। लिखित परीक्षा के प्रश्नपत्र पर ही परीक्षार्थियों ने सवाल उठाया था। प्रश्न और उत्तर गलत होने की सुनवाई चयन बोर्ड की ओर से नहीं होने के बाद परीक्षार्थियों ने अंतिम परिणाम जारी होने के बाद कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी।

परीक्षार्थियों का तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने टीजीटी-पीजीटी के कई विषयों की कापी का पुनर्मूल्यांकन करने का आदेश दिया था। पुनर्मूल्यांकन के बाद कई विषयों के परिणाम तो जारी कर दिए गए हैं, अभी हिन्दी का परिणाम जारी नहीं हो सका है। चयन बोर्ड अब नए सिरे से इन विषयों के लिए साक्षात्कार कराएगा।

चयन बोर्ड के सचिव वंश गोपाल मौर्या ने बताया कि परिणामों का पुनर्मूल्यांकन पूरा होने के बाद बोर्ड की ओर से साक्षात्कार की तिथि घोषित की जाएगी। इसमें कुछ विषयों की कापी के पुनर्मूल्यांकन के बाद साक्षात्कार पूरा भी किया गया है। बोर्ड की ओर से सामाजिक विज्ञान के परिणाम में एक बार संशोधन करके साक्षात्कार पूरा करने के बाद कोर्ट के आदेश के बाद दोबारा मूल्यांकन करवाया जाएगा।

NCR Khabar News Desk

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